श्यामनगर सेवाकेंद्र में आध्यात्मिक उमंग एवं उल्लास के साथ मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
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| श्यामनगर सेवाकेंद्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप के साथ उपस्थित ब्रह्माकुमारी बहनें एवं भाई। |
राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप की दीप-पुष्प एवं आरती के साथ पूजा-अर्चना, डांडिया रास और केक कटिंग ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
श्यामनगर | Spiritual Mirror News
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, श्यामनगर सेवाकेंद्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आध्यात्मिक उमंग, श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी शीला दीदी, ब्रह्माकुमारी लीला दीदी, ब्रह्माकुमारी दिव्या दीदी, ब्रह्माकुमार कान्हा भाई सहित संस्थान से जुड़े भाई-बहन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के शुभारंभ में शिवबाबा को भोग अर्पित किया गया। इसके पश्चात दो नन्हे बच्चों को राधा-कृष्ण के मनमोहक बाल स्वरूप में सजाया गया। दीप प्रज्वलित कर, पुष्प अर्पित करते हुए आरती के साथ राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान सेवाकेंद्र का वातावरण आध्यात्मिक भाव एवं उमंग से भर उठा।
राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप में सजे नन्हे बच्चों ने सभी का मन मोह लिया। भाई-बहनों ने प्रेम एवं श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना में सहभागिता की। राधा-कृष्ण के मनमोहक स्वरूप ने जन्माष्टमी के आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
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| श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर राधा-कृष्ण के मनमोहक बाल स्वरूप। |
श्रीकृष्ण की 16 कलाओं और दिव्य गुणों का बताया आध्यात्मिक रहस्य
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी शीला दीदी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का स्वरूप पवित्रता, दिव्य गुणों और श्रेष्ठ संस्कारों से सम्पन्न संपूर्ण व्यक्तित्व का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक दृष्टि से श्रीकृष्ण को 16 कलाओं से सम्पन्न कहा जाता है। ये कलाएँ केवल बाहरी सुंदरता या सांसारिक उपलब्धियों का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मिक श्रेष्ठता, पवित्रता, दिव्य गुणों और संपूर्णता की ओर संकेत करती हैं। जन्माष्टमी का पर्व हमें यह प्रेरणा देता है कि हम भी अपने जीवन से विकारों एवं नकारात्मक संस्कारों को दूर कर ज्ञान, योग, पवित्रता, प्रेम, शांति और श्रेष्ठ चरित्र जैसे दिव्य गुणों को धारण करने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने विचारों, बोल और कर्मों को श्रेष्ठ बनाना ही इस पर्व का वास्तविक उद्देश्य है। ब्रह्माकुमारीज की आध्यात्मिक व्याख्या में भी श्रीकृष्ण को पवित्रता एवं दिव्य गुणों से सम्पन्न श्रेष्ठ व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किया जाता है।
ब्रह्माकुमारी शीला दीदी ने उपस्थित सभी भाई-बहनों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों को अपने जीवन में अपनाने और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
डांडिया रास में दिखी उमंग और उत्साह
राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना एवं आरती के पश्चात जन्माष्टमी की खुशी में डांडिया रास का आयोजन किया गया। भाई-बहनों ने उमंग और उत्साह के साथ डांडिया रास में सहभागिता की। आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में आनंद और उल्लास का रंग भर दिया।
केक कटिंग के साथ मनाया जन्मोत्सव
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| श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से केक कटवाकर जन्माष्टमी की खुशियाँ मनातीं ब्रह्माकुमारी बहनें। |
कार्यक्रम के अगले क्रम में श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में सजे बच्चे से केक कटवाकर जन्माष्टमी की खुशियाँ मनाई गईं। उपस्थित भाई-बहनों ने हर्षोल्लास के साथ एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ दीं।
आध्यात्मिकता और उत्सव का रहा सुंदर संगम
श्यामनगर सेवाकेंद्र में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम में आध्यात्मिक चिंतन, पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक उमंग और आपसी प्रेम-स्नेह का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम ने सभी को श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में पवित्रता, श्रेष्ठ संस्कार, शांति, प्रेम और सद्भावना को धारण करने का संदेश दिया।
Report & Chief Editor: Krishna Chandra Sahu
Spiritual Mirror News
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