शिक्षक विश्व एकता के पथ-प्रदर्शक : बालोद में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित
ब्रह्माकुमारीज के दिव्य दर्शन भवन में शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा के साथ संस्कार और मानवीय मूल्यों पर दिया गया जोर
बालोद, 5 सितंबर 2026। शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, दिव्य दर्शन भवन, पांडेपारा, बालोद में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह का विषय “शिक्षक : विश्व एकता के पथ-प्रदर्शक” रहा।
कार्यक्रम में शिक्षकों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। समारोह का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, स्वागत नृत्य, दीप प्रज्वलन एवं कविता प्रस्तुति के साथ हुआ। कार्यक्रम का मंच संचालन बी.के. रूपेश बहन ने किया।
50 वर्षों की शिक्षकीय यात्रा के अनुभव किए साझा
कार्यक्रम की विशेष अतिथि बाल मंदिर की बड़ी दीदी श्रीमती तिवारी दीदी ने अपने लगभग 50 वर्षों के शिक्षकीय जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देना भी है।
उन्होंने वर्तमान समय में बच्चों को ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार, अनुशासन, नैतिकता, प्रेम, सम्मान और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बचपन में दिए गए संस्कार जीवनभर व्यक्ति के व्यक्तित्व में दिखाई देते हैं। इसलिए शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों के भीतर श्रेष्ठ विचार एवं श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण करें।
बाल मंदिर की शिक्षण यात्रा पर डाला प्रकाश
छोटी दीदी श्रीमती नमिता बैस ने बाल मंदिर की शिक्षण यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाल मंदिर में बालोद शहर की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों एवं गणमान्य नागरिकों ने बचपन में शिक्षा प्राप्त की है।
उन्होंने शिक्षा के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं संस्कार निर्माण को समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
बी.के. सरस्वती दीदी ने बताई शिक्षक की भूमिका
कार्यक्रम में दिव्य दर्शन भवन, पांडेपारा, बालोद की संचालिका बी.के. सरस्वती दीदी ने अपने संबोधन में शिक्षक की भूमिका को समाज निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षक आने वाली पीढ़ी के चरित्र और सोच को दिशा देने का कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा के साथ श्रेष्ठ संस्कार और सकारात्मक विचार दिए जाएं, तो समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता की भावना को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व एकता की शुरुआत व्यक्ति और परिवार के संस्कारों से होती है और इस दिशा में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
सेवानिवृत्त शिक्षक बी.के. भजन लाल साहू ने साझा किए अनुभव
नवागांव के सेवानिवृत्त शिक्षक एवं बी.के. भजन लाल साहू ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि ब्रह्माकुमारीज से जुड़ने के बाद उनके जीवन में किस प्रकार सकारात्मक परिवर्तन आया।
उन्होंने ईश्वरीय ज्ञान एवं राजयोग से मिले अनुभवों को साझा किया और उपस्थित लोगों को भी श्रेष्ठ जीवन के लिए इससे जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए बाहरी उपलब्धियों के साथ मन की शांति, सकारात्मक सोच और श्रेष्ठ संस्कार भी आवश्यक हैं।
शिक्षकों का किया गया सम्मान
समारोह के दौरान उपस्थित शिक्षकों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम की प्रभारी बी.के. सरस्वती दीदी द्वारा शिक्षकों को ईश्वरीय उपहार, नैपकिन एवं मिठास (भोग) भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता एवं सम्मान की भावना व्यक्त की गई।
विशेष अतिथि के रूप में श्री संतोष राव कृदूत की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में शिक्षक, विद्यार्थी, बी.के. परिवार एवं नगर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
कार्यक्रम की सफलता में रहा सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में बी.के. उमेद भाई, बी.के. अनुराधा, बी.के. वंदना, बी.के. तुलसी सहित समस्त ब्रह्माकुमारीज परिवार का सहयोग रहा।
समारोह में यह संदेश दिया गया कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि संस्कारों का निर्माता, चरित्र का मार्गदर्शक और समाज में एकता एवं सद्भाव की दिशा दिखाने वाला महत्वपूर्ण व्यक्तित्व है। शिक्षा के साथ बच्चों में संस्कारों का विकास करना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
“शिक्षक : विश्व एकता के पथ-प्रदर्शक” विषय पर आयोजित यह शिक्षक सम्मान समारोह शिक्षकों के प्रति सम्मान और नई पीढ़ी के संस्कार निर्माण का संदेश देते हुए संपन्न हुआ।
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